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Chapter 16 of 30
Flashcards

प्रेमचंद के फटे जूते

CBSE · Class 9 · Hindi

Flashcards for प्रेमचंद के फटे जूते — CBSE Class 9 Hindi. Quick Q&A cards covering key concepts, definitions, and formulas.

45 questions20 flashcards5 concepts
20 Flashcards
Card 1लेखक परिचय

प्रेमचंद के फटे जूते निबंध के लेखक कौन हैं और उन्हें किस विधा के लिए जाना जाता है?

Answer

लेखक: हरिशंकर परसाई। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं और व्यंग्य विधा के जनक माने जाते हैं। उनके लेखन में सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक पाखंड पर तीखे व्यंग्य हैं।

Card 2मुख्य प्रसंग

प्रेमचंद की फोटो में क्या विशेषता लेखक ने देखी जिसने उनका ध्यान आकर्षित किया?

Answer

प्रेमचंद के बाएं पैर के जूते में बड़ा छेद था जिससे उनकी अंगुली बाहर निकली हुई थी। दाहिना जूता ठीक था लेकिन बाएं जूते की यह दशा ने लेखक को सोचने पर मजबूर कर दिया।

Card 3साहित्यिक विधा

व्यंग्य किसे कहते हैं और इस निबंध में व्यंग्य की विशेषता क्या है?

Answer

व्यंग्य का अर्थ है हास्य के माध्यम से समाज की बुराइयों पर प्रहार करना। इस निबंध में परसाई जी ने आज के युग की दिखावे की प्रवृत्ति, ढोंग, और सामाजिक भ्रष्टाचार पर तीखा व्यंग्य किया है।

Card 4व्यंग्य-मुस्कान

लेखक ने प्रेमचंद की व्यंग्य-मुस्कान का क्या अर्थ समझा है?

Answer

लेखक के अनुसार प्रेमचंद की मुस्कान में व्यंग्य और उपहास है। यह मुस्कान उन लोगों पर है जो दिखावा करते हैं, परदे में रहते हैं, और सच्चाई से आंखें मूंदकर चलते हैं।

Card 5शब्द अर्थ

पोशाक' शब्द का प्रसंग में अर्थ स्पष्ट करते हुए प्रेमचंद के व्यक्तित्व की विशेषता बताइए।

Answer

पोशाक का अर्थ है वेश-भूषा। प्रेमचंद में 'पोशाकें बदलने का गुण नहीं था' - अर्थात वे सदैव सरल और सहज रहते थे। वे दिखावा नहीं करते थे और जैसे थे वैसे ही रहते थे।

Card 6प्रतीकात्मक अर्थ

लेखक और प्रेमचंद के जूतों की दशा में क्या अंतर है और इसका प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?

Answer

प्रेमचंद का जूता ऊपर से फटा था (अंगुली दिखती थी) पर तला सुरक्षित था। लेखक का जूता ऊपर से ठीक था पर तला फटा था। प्रतीकात्मक अर्थ: प्रेमचंद खुले में सच्चाई दिखाते थे, आज के लोग बाहर से ठीक दिखते हैं पर

Card 7आर्थिक स्थिति

'टोपी' और 'जूते' के आनुपातिक मूल्य से लेखक का क्या तात्पर्य है?

Answer

उस जमाने में टोपी आठ आने में मिलती थी और जूते पांच रुपए में। जूता हमेशा टोपी से महंगा रहा है। लेखक का तात्पर्य है कि प्रेमचंद के पास टोपी खरीदने के पैसे थे पर जूते के लिए नहीं - यह उनकी आर्थिक तंगी को

Card 8उदाहरण व्याख्या

कुंभनदास का उदाहरण देकर लेखक क्या कहना चाहता है?

Answer

कुंभनदास के जूते फतेहपुर सीकरी जाने-आने में घिस गए थे। उन्होंने कहा था 'अवत जात पन्हैया घिस गई, बिसर गयो हरि नाम'। लेखक कहना चाहता है कि चलने से जूता घिसता है, फटता नहीं। प्रेमचंद का जूता किसी सख्त ची

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in प्रेमचंद के फटे जूते for CBSE Class 9 Hindi?

प्रेमचंद के फटे जूते covers several key topics that are frequently asked in CBSE Class 9 board exams. Focus on the core concepts listed on this page and practise related questions to build confidence.

Start by understanding all key concepts. Practise previous year questions from this chapter. Revise formulas and definitions regularly. Use flashcards for quick revision before the exam.

There are 20 flashcards for प्रेमचंद के फटे जूते covering key definitions, formulas, and concepts. Use them daily for 10–15 minutes for best results.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.